Thursday, 13 March 2008

खोखला है दैनिक भास्‍कर का दावा


भास्‍कर का दावा

दैनिक भास्‍कर ने खुद को साइंटिफिक एप्रोच वाले अखबार होने का दावा किया है। पता नहीं उनकी साइंटिफिक एप्रोच कितनी है। पर उन्‍होंने जिस बात को लेकर दावा किया है वह खुद ही गलत है।
भारत की हॉकी में हार के दिन यानी मंगलवार को अखबार ने राजस्‍थान संस्‍करण में यह दावा किया कि वह साइंटिफिक‍ एप्रोच का अखबार है। अखबार का कहना था कि वे काला दिन शब्‍द का प्रयोग नहीं करते क्‍योंकि प्रकृति ने सभी दिन श्रेष्‍ठ बनाए हैं, ऐसे में दिन की क्‍या गलती। अखबार का कहना था कि हार के लिए गिल जिम्‍मेदार या टीम, लेकिन सोमवार का कोई कसूर नहीं।
लेकिन तीसरी आंख ने उसी दिन दैनिक भास्‍कर के दूसरे संस्‍करणों में पकडा कि वहीं समाचार में काला दिन लिखा हुआ है। अब आप ही तय कीजिए कितना सही है दावा।

2 comments:

Ashish Maharishi said...

जनाब हर अखबार की अपनी स्‍टाइल शीट होती है, यदि उन्‍होंने गलती से काला शब्‍द का उपयोग लिख दिया तो क्‍या बवाल हो गया।

Sanjeet Tripathi said...

ऐसा है भईए कि किसी बात का दावा करना और उस पर टिके रहना दो अलग अलग बातें होती है।
और वैसे भी यह भास्कर खुद कैसे तय कर लेगा कि वह कैसा अखबार है , यह तो पाठक तय करते हैं कि कौन सा अखबार कैसा है।

वैसे तीसरी आंख बढ़िया है, लगे रहें